जयपुर की वह सुबह

जयपुर  की वह सुबह कभी नहीं  भूल सकती, भोर में तीन बजे पहुँचते ही सुनील कैमरे के साथ हमें ले उड़ा जयपुर की सैर करने । कैमरा हाथ में आया तो कई पुरानी यादें ताजा हो आईं । मैंने भी अरावली के गोद  में बैठे  इस परिंदे को कैद कर लिया ।  सुबह के धुंध के चादर में लिपटी  अरावली घाटी में बैठा यह परिंदा एक अजब सी शान्ति का अहसास करा रहा था । 
इस  गौरैया के  धुंध के बीच अकेले बैठने से इसके संकट में होने का अहसास हो रहा था । 

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