कुछ कहना चाहता हूं...



सुनो तो, तुमसे कुछ कहना चाहता हूं
मैं एक गजल लिखना चाहता हूं
तुम्हारी खूबसूरती को शब्दों में पिरोना चाहता हूं
गजल गुनगुनाना चाहता हूं
तुम्हें सुनाना चाहता हूं
पास बैठो तो
जी भर देखना चाहता हूं
तुम्हारी हंसी को दिल में उतारना चाहता हूं
तुमसे इतना सा कहना चाहता हूं
जिंदगी में कुछ कदम
साथ चलना चाहता हूं
तुझमें खुद को फ़ना करना चाहता हूं
तुमसे बस इतना कहना चाहता हूं
तुम्हारे संग कुछ पल हंसना चाहता हूं
रूठो तो मनाना चाहता हूं
एक आखिरी तमन्ना मैं पूरी करना चाहता हूं
जहां छोड़ने से पहले
तेरे कंधे पर सर रखकर रोना चाहता हूं
तुमसे बस इतना सा कहना चाहता हूं

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

गड़रिये का जीवन : सरदार पूर्ण सिंह

तलवार का सिद्धांत (Doctrine of sword )

युद्धरत और धार्मिक जकड़े समाज में महिला की स्थित समझने का क्रैश कोर्स है ‘पेशेंस ऑफ स्टोन’

माचिस की तीलियां सिर्फ आग ही नहीं लगाती...

महत्वाकांक्षाओं की तड़प और उसकी काव्यात्मक यात्रा

महात्मा गांधी का नेहरू को 1945 में लिखा गया पत्र और उसका जवाब

स्त्री का अपरिवर्तनशील चेहरा हुसैन की 'गज गामिनी'

गांधी और सत्याग्रह के प्रति जिज्ञासु बनाती है यह किताब

बलात्कार : एक सोच

समस्याओं के निदान का अड्डा, 'Advice Adda'