मैं खोया उन्ही ख्यालों में...

सुलगती सिगरेट लिए हाथो में
था बैठा चांदनी रातों में
अंगुलियां उलझा रहा था बालों में
जैसे उलझ रही हों उसके बालों में
दिखेगी कैसी वह चांदनी के श्वेत प्रकाश में
था खोया मै इन्हीं ख्यालों में
कभी तो देखूंगा उसको मै
पूरनमासी उजालों में
बस इसी इंतजार में कट गई जिंदगी
जैसे कट जाए कुछ लम्हों में

एक दिन छोड़ गई मुझको वह सूनसान अंधेरी राहों में
सारे अरमानों को दफ्न किया मैने
दिल के अंधेरे कोनों में
काश ! न आई होती वह
शायद जिंदगी कट जाती कुछ दिन और उजालों में
तब भी खोया था उसी ख्यालों में
अब भी खोया हूं उसी ख्यालों में
बस अंतर इतना आया जीने में
तब करता था इंतजार उजाली रातों में
अब करता हूं इंतजार अंधेरी रातों में

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