गम से है खुशियों की खनक

जिंदगी भी अजब पहेली है, कभी हम गमों के समंदर में गोते लगाते हैं तो आने वाले कुछ पलों बाद ही हमारी जिंदगी मे खुशियों की बहारें नजर आती हैं, कभी-कभी तो लगता है कि गम इंतजार कर रहा है, कब खुशी जाये और वह वापस आये
खुशियां तो मेहमान की तरह होती हैं वे पल दो पल के लिए आती हैं, हम खुशियों का स्वागत भी मेहमान की ही तरह करते हैं | लेकिन गम तो एकदम लगोटिया यार की तरह होता है, अरे कहावत है ना "घर की मुर्गी साग बराबर" इस पर एकदम फिट बैठती है | अब बेचारा गम जिंदगी जीने में इतना बड़ा रोल प्ले करता है, और हम हैं कि इसकी इज्जत ही नहीं करते| जरा सोचिये कि अगर गम न हो तो क्या हम सब खुशियां कब आईं और कब चली गईं, जान पायेंगे, शायद नहीं, क्योंकि हम खुशियों की कीमत ही नहीं समझेंगे | जिंदगी का एक फलसफा है कि जो चीज जितनी जद्दोजहद से मिलती है वह उतनी ही बेशकीमती होती है |
इसी पर एक  शेर और बात खत्म...
गम और खुशियों का यराना है,
जब तक गम है तभी तक खुशियों का तराना है
गम तो है ता उम्र के लिए खुशियां तो पल दो पल का 
 फसाना हैं

यायावर प्रवीण

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