क्रोध के कितने रंग

 गुस्सा जीव का एक स्वाभाविक भाव है। आम तौर पर हर किसी का गुस्सा एक सा ही दिखता है। लेकिन असलियत में यह अपने भीतर कई सारे रंग और वजहें समेटे हुए होता है। गुस्से को हानिकारक मानने की एक सामान्य सी धारणा है।मानोविज्ञान की प्रोफेसर लीजा फील्डमैन का यह लेख गुस्से या क्रोध की कई सारी परतें खोलता है। गुस्से पर प्रियदर्शन की एक कविता की कुछ पंक्तियां हैं- जो इसके सबसे अधिक दिखने वाले लक्षण को बयां करती हैं।

बहुत सारी चीज़ों पर आता है गुस्सा / सबकुछ तोड़फोड़ देने, तहस-नहस कर देने की 
एक आदिम इच्छा उबलती है/ जिस पर विवेक धीरे-धीरे डालता है ठंडा पानी
कुछ देर बचा रहता है धुआं इस गुस्से का / तुम बेचैन से भटकते हो,
देखते हुए कि दुनिया कितनी ग़लत है, ज़िंदगी कितनी बेमानी



लिसा फील्डमैन बैरट
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कड़वाहट, द्वेष और रोष। गुस्से की असंख्य किस्में हैं। कुछ हल्की होती हैं और कुछ रुखे और शक्तिशाली जैसे कि प्रचंड क्रोध। भिन्न भिन्न गुस्से की तीव्रता के साथ उद्देश्य भी अलग-अलग होते हैं। यह चीखते हुए बच्चे पर सामान्य उत्तेजना के रूप में होता है और राजनीतिक प्रतिद्वंदी से घृणा के रूप में। लेकिन अपने ही बच्चे के तिरस्कार का भाव असामान्य और विलक्षण होता है। 

गुस्सा एक बड़ी और विभिन्नता भरी जनसंख्या का व्यवहार और अनुभव है। जैसा कि मेरे जैसे मनोवैज्ञानिकों जो इमोशन की स्टडी करते हैँ, वे कहते हैं। आप गुस्से में चिल्ला सकते हैं, रो सकते हैँ, यहां तक कि मुस्करा भी सकते हैं। इसके अलावा झुंझलाहट के साथ दिल की धड़कन बढ़ सकती है या फिर बदला लेने का प्लॉट तैयार कर सकते हैं। चेहरे, शरीर या मस्तिष्क की कोई एकमात्र स्थिति नहीं है जो कि गुस्से को परिभाषित कर सके। इसमें भिन्नता समान्य है। 
जिसे अमेरिकी क्रोध कहते हैं उसके लिए रूसी भाषा में दो अलग-अलग अवधारणाएं हैं। पहला वह जिसे कोई व्यक्ति निर्देशित करता है। इसे serditsia कहते हैं और दूसरा जो ज्यादा अमूर्त या एब्सट्रैक्ट होता है उसे ज्लिस्तिया कहते हैं। यह अक्सर राजनीतिक परिस्थितियों की वजह से जन्म लेता है। जर्मन में गुस्से के तीन प्रकार हैं, मंदारिन में पांच और बाइबिकल हिब्रू में सात हैं। 
 
पिछले कुछ सप्ताह में क्रोध के कई प्रकार देखने को मिले। पहले तो हमने एक आदर्श गुस्से वाले व्यक्ति को राष्ट्रपति चुना है। डोनाल्ड जे ट्रंप इस बात को लेकर आक्रामक और दृढ़ हैं कि देश में कुछ गड़बड़ है। यह उन्हें चिड़चिडाने के लिए उकसाता है। वे अपने पावर और स्टेटस को बनाए रखने  के लिए प्रभावी ढ़ंग से नियोजित करते हैं। ट्रंप के क्रोध को उनके फैन स्ट्रेंथ की तरह देखते हैं और उनके विरोधी इसे बम ब्लास्ट की तरह। 

हमने हिलेरी क्लिंटन के अधिक संयमित क्रोध को भी देखा है, जिसे उन्होंने कैंपेन के दौरान भेदभाव के खिलाफ जाहिर किया। हिलेरी के समर्थकों के लिए उनके क्रोध ने ट्रंप के विवादित बयानों को तगड़ा झटका दिया। जबकि उनके विरोधियों के वह सिर्फ चीखना था। 
संभावना है कि आपने इस चुनाव के माध्यम से क्रोध के कई लग-अलग रंग देखे होंगे। संभव है आप उन एलीटिज्म वाले एक प्रतिशत के ऊपर ऊपर कुढ़े होंगे जो खुद के विशेषाधिकारों, अहंकार और दुख में अंधे हैं। संभव है आपको महिलाओं, अल्पसंख्यकों और प्रवासियों के अपमान से नाराजगी हुई होगी। यह भी संभव है कि आप अपने उन बेवकूफ साथी नागरिकों की निंदा करना चाहते हों जो विभाजनकारी राजनीति की तरफ हैं या फिर जिस उम्मीदवार का समर्थन करते हैं उसी की गले की हड्‌डी बनने वाले फैसलो की निंदा करना चाहते होंगे। 

गुस्सा लोगों के बीच दूरियां बढ़ा सकता है, दो तरफा तीखी बहस आपसी दुर्भावना को जन्म दे सकती है। यदि चुनाव कार रेडियो ऑफ करने या ट्विटर न पढ़ने को प्रोत्साहित करे और चुपचाप रहने को कहे तो आप अपने गुस्से को महसूस कर सकते हैं। 
लेकिन सभी तरह के क्रोध बांटने वाले और विनाशकारी नहीं होते। कुछ उत्साहित करने वाले रचनात्मक होते हैँ। निराशा की स्थिति में एंडीडॉट की तरह। रिसर्चरों ने पाया है कि यदि आप राजनीतिक परिस्थितियों से डरे हुए हैं तो आपका गुस्सा लोगों का नेतृत्व करके आपको शांत कर सकता है। उनके साथ आपके बांड को मजबूत कर सकता है। यदि आप अमेरिका के दर्शन में विश्वास करते हैं, जिसे कि ध्वस्त कर दिया गया है। इस प्रति गुस्से को अन्य लोगों से साझा करते हैं तो वे इसे सशक्त बना सकते हैं। इस तरह का गुस्सा एक कम्युनिटी का निर्माण करता है।
 
बुद्धिज्म सिखाता है कि क्रोध या गुस्सा अज्ञानता का एक रूप है। यदि आवेश के बीच में अपने विरोधी को शैतान के रूप में देखने की बजाए निराश और बदलाव की कोशिश के तौर पर देखते हैं तो यह दूसरे पक्ष के लिए सहानुभूति को जन्म देता है। मतलब कुछ क्रोध ज्ञान का एक रूप भी होता है। क्रोध का अन्य रचनात्मक रूप कॉन्टेस्ट, राजनीति या अन्य क्षेत्रों में मदद कर सकता है। जैसे कि जो फुटबाल खिलाड़ी खेल से पहले गुस्सा उत्पन्न करते हैं। वे खेल के दौरान प्रतिस्पर्धी को शिकस्त देने के लिए चिल्लाते हैं, उछलते हैं और हवा में अपनी मुठि्ठयां भींचते हैं। खिलाड़ियों का यह आक्रामक रुख उनके प्रदर्शन को बेहतर बनाता है और विपक्षी टी को सावधान रहने को कहता है। क्या हुआ 2016 के कैंपेन में। मतदाताओं ने गुस्से में वोट किया और सरकार बदल दी। 
एक रचनात्मक क्रोध वह भी है जो कि हास्य, व्यंग्य के माध्यम से व्यक्त होता है। ऐसे समान्य अवस्था में हम एक विभाजित देश हैं। लेकिन गुस्से में एक हो जाते हैं। हमारा व्यक्तिगत गुस्सा संकेत होता कि हम कुछ चीजों पर सावधानी से ध्यान देते हैं। हम उसमें गहराई से निवेश कर रहे हैं। चाहे भले ही गुस्सा भिन्न-भिन्न चीजों के लिए हो। चुनाव के बाद ट्रंप से कुछ नए अमेरिकी नाराज हुए हैं। ट्रंप जीत गए तो कुछ गुस्से से खुशी की तरफ बढ़ गए। 


(लेखिका अमेरिका की नार्देस्टर्न यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान की प्रोफेसर हैं। यह लेख न्यूयार्क टाइम्स में 12 नवंबर 2016 को प्रकाशित हुआ था। )

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