हम वहीं खड़े हैं

मसरूफियत के

जिस चौराहे पर

खड़े हो तुम

उसके ठीक पीछे

दो फर्लांग की दूरी पर

मेरे हसीन ख्वाबों की झील है

जिसमें तैराता हूं

तुम्हारे नाम की नावें

दुनिया से बेफिक्र होकर

कुछ लोग इसे मेरा

पालपन समझते हैं

औऱ कुछ तुम्हें

बदनाम करनें की साजिश

लेकिन हैरान तो मैं इस पर हूं

मेरे इस कारनामे को

न तो पागलपन समझती हो

ना ही कोई साजिश

बस खड़ी हो

उसी मसरूफियत के

चौराहे पर

जहां पहली बार

मिले थे

 






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