मै हूं खुली किताब

मै हूं खुली किताब जैसा
पढ़ सकता है कोई भी
बहुतों ने पढ़ा इसको
कुछ पन्ने भी फाड़ लिए
अब इल्तजा है
तुमसे इतनी सी
मत फाड़ना
बचे पन्नो को
मिट जाएगी
मेरी किताब
खो देगी यह
शक्ल अपनी
पढ़ कर न लगाना हो
 सीने से तो
मत लिखना
अपना नाम
लाल स्याही से
ताकि बचे पन्नो पर
लिख सकूं जिंदगी
फिर से भर सकूं
हौसले की उड़ान
बस इतनी सी
इल्तजा है तुमसे
 इतनी सी
न संजोना हो गर
जर्जर पन्नो को
तो मत लगाना हाथ
फट जाएंगे तो
मिट जाएगी
मेरी किताब

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