कहां खो गया मेरा गांव

कहां खो गया मेरा गांव कोई तो बता दे,
गुड़ की महक, चिड़ियों की चहक किसने चुराया कोई तो बता दे,
गन्ने की मिठास, इमली की खटास किसने छीना कोई तो बता दे ।
अब मेरे गाव की गलियों से गुम  हो चुकी बैलों की पदचाप है,
अखाड़ों से शांत हो चुकी ढोलक की थाप है,
ऐसा क्यों हुआ मेरे गांव   का ह्रास है, कोई  दे ।
गाँव में ठंडी पड़ चुकी गुलऊर की आग है,
सब में बढ़ गयी लालच की प्यास है,
आपसी रिश्तों पर जम चुकी द्वेश की राख है,
ये कैसा विकास हाय ये कैसा विकास है।    
मुझे कोई तो बता दे ।

टिप्पणियाँ

  1. गाँव वालों में गांव को शहर बनाने की लत जो लग गयी है,,,,,,,,,,,,,,,,,,

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